देहरादून: उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान योजना के तहत जनता को मिलने वाली निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब इन दोनों योजनाओं को पूरी तरह इंश्योरेंस मोड पर संचालित किया जाएगा। इस फैसले से अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा, जबकि आम जनता के इलाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार ही वहन करेगी, लेकिन अस्पतालों को भुगतान इंश्योरेंस कंपनी और थर्ड पार्टी एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा। इससे लंबित भुगतान की समस्या खत्म होगी।
इसके साथ ही गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत ₹5 लाख तक के इलाज का खर्च इंश्योरेंस के माध्यम से और ₹5 लाख से अधिक का खर्च ट्रस्ट मोड के जरिए किया जाएगा।
गोल्डन कार्ड अंशदान बढ़ने की संभावना….
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि गोल्डन कार्ड योजना के तहत अस्पतालों का करीब ₹125 करोड़ का बकाया है, जिसे राज्य सरकार वहन करेगी। साथ ही कर्मचारियों से लिए जाने वाले वार्षिक अंशदान में ₹250 से ₹450 तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। पिछले 5 वर्षों से अंशदान में कोई वृद्धि नहीं की गई थी।
चिकित्सा शिक्षा और डॉक्टरों को राहत
मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है।
इसके अलावा सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए नए विभागों का गठन किया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों को अतिरिक्त भत्ता
राज्य सरकार ने दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों को वेतन मैट्रिक्स में 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने का भी निर्णय लिया है।
वहीं, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 277 संविदा और दैनिक वेतन कर्मचारियों को समान कार्य–समान वेतन का लाभ देने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडलीय उपसमिति को भेजा गया है।









