देहरादून:  उत्तराखंड के कई गांव आज भी पेयजल, सड़क और बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन राज्य के कुछ सांसद अपनी सांसद निधि का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से इसका खुलासा हुआ है।
RTI से मिले दस्तावेजों के अनुसार उत्तराखंड के सांसदों ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में सड़क, स्कूल, सामुदायिक भवन, जल निकासी और अन्य विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की सांसद निधि खर्च की है।

टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने कहा कि उत्तराखंड के लोग पूरे देश में रहते हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों में भी विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि नियमों में बदलाव के बाद सांसदों को दूसरे राज्यों में भी निधि खर्च करने की छूट मिली है।
वहीं, अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा पर नैनीताल जिले में दरियादिली दिखाने का आरोप लगा है। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल-कॉलेजों में कमरों और हॉल के निर्माण के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए गए।

इस मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं कि जब उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है, तो सांसद निधि का बड़ा हिस्सा राज्य से बाहर क्यों खर्च किया जा रहा है।

RTI दस्तावेजों के मुताबिक, उत्तराखंड से सांसदों ने वित्तीय वर्ष 2024–25 में उत्तर प्रदेश के अमरोहा, सहारनपुर और हरियाणा के कुछ जिलों में सांसद निधि से कार्य स्वीकृत कराए। इनमें सड़क निर्माण, स्कूलों में कक्षाएं, सामुदायिक भवन, शौचालय और जल निकासी जैसे कार्य शामिल हैं।

नियमों में हुए बदलाव का हवाला देते हुए बताया गया कि केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के 13 अगस्त 2024 के पत्र के बाद सांसद अब अपने क्षेत्र से बाहर भी विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। हालांकि एक वित्तीय वर्ष में इसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है।

पूर्व में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने हरियाणा में स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक भवनों के लिए 25 लाख रुपये की निधि स्वीकृत कराई थी। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010–16) के दौरान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी और सड़क निर्माण के लिए तीन लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं, तब सांसद निधि का राज्य से बाहर खर्च होना सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि प्राथमिकता उत्तराखंड के दूरस्थ और आपदा-प्रभावित क्षेत्रों को मिलनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here