देहरादून: उत्तराखंड में NEET UG के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिले को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। देहरादून में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से दाखिला हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाण-पत्र और दस्तावेज इस्तेमाल करने के मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले का खुलासा प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के दौरान हुआ। जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर हुई जांच में संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिए गए। मामले में रायपुर और क्लेमनटाउन थाने में राजस्व विभाग की ओर से मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक, क्लेमनटाउन थाने में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी को आरोपी बनाया गया है, जबकि रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति को नामजद किया गया है। आरोप है कि तीनों ने फर्जी दस्तावेज और आधार कार्ड के जरिए आरक्षित कोटे का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था।

राज्य में इस कोटे के तहत नौ सीटें आवंटित हुई थीं, जिनमें पांच अभ्यर्थियों ने दाखिला लिया था। सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद चार दाखिले निरस्त कर दिए गए।

234 अंक वाली अभ्यर्थी को भी मिला मेडिकल कॉलेज

जांच में यह भी सामने आया कि स्वाति को NEET में 234 अंक मिलने के बावजूद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज आवंटित हुआ था। वहीं परी को हल्द्वानी, खुशी को श्रीनगर और तृप्ति को हरिद्वार मेडिकल कॉलेज आवंटित किया गया था। पुलिस अब NEET आवेदन के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

एससी-एसटी कोटे के दाखिलों की भी जांच

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब एससी-एसटी कोटे के MBBS दाखिलों की भी जांच शुरू हो गई है। एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने आरक्षण का लाभ लेकर दाखिला लेने वाले आठ छात्र-छात्राओं को मूल निवास, जाति और आरक्षण से जुड़े सत्यापित दस्तावेजों के साथ तलब किया है।

फर्जी प्रमाण-पत्र के पीछे नेटवर्क की आशंका

पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं हो सकता। फर्जी पते, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए प्रमाण-पत्र हासिल कराने वाले किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस आवेदन में इस्तेमाल आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, फोटो और अन्य दस्तावेजों की कड़ियां जोड़ रही है।

मामले में BNS की धारा 318(4), 338 और 340 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक नगर के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT गठित करने की तैयारी भी की जा रही है।

मुख्य सवाल: सरकारी MBBS सीटों पर फर्जी प्रमाण-पत्र के जरिए दाखिला कराने वाले इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग हैं और राजस्व स्तर पर प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले सत्यापन में चूक कैसे हुई?

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